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तब शुभमंगल आपको ये होली हो

 फुहार रंगों की बरसती हो,  खुशीयों की बस बस्ती हो, धुन प्यार की जहां बजती हो महफिल अपनों की सजती हो तब शुभमंगल आपको ये होली हो।। पिय मिलन की आस पूरित हो ज्यों चातक की प्यास पूरित हो  जीवन ना कहीं संत्रास पूरित हो बस हर्ष और उल्लास पूरित हो तब शुभमंगल आपको ये होली हो।। पीत वसन जब सबके तन हो प्रीत बसत जब सबके मन हो उल्लासित जब क्षण क्षण हो सुख समृद्धि जब कण कण हो तब शुभमंगल आपको ये होली हो।। जीवन में खुशियों के रंग छाए, गम के ना कभी बादल आएं, आएं करें एक संकल्प नया सत्कर्मों से अपने हम सब  मिलकर बनाएं एक उन्नत राष्ट्र नया तब शुभमंगल आपको ये होली हो।। ना हमारी ना तिहारी हो ना हल्का ना भारी हो नशा रंगो का तारी हो सहाय सदा बनवारी हो कहे यही ठेठबिहारी हो तब शुभमंगल आपको ये होली हो।।

कौन

 बर्फ के मानिंद सफेद चेहरों पर स्याह लब़ों से फूटती आहों में जो दर्द बयां होता है उसे समझ सका कौन? ज़मीं पर खुन की स्याही से मुल्क में अमन-चैन की खातिर लिखते शहादत की जो कहानी चंद लम्हों में लिपटी रात खुशी वाली आई लिए हाथों में मेहंदी की लाली अहले सुबह क्यों हुईं थीं आंखें काली उत्तर इन प्रश्नों का देगा कौन? काँटों सी चुभन लिए बातों को सहते छलनी होते दामन को कलियों से नर्म बेचैन इस मन को प्रेम से भीगो देगा कौन? हर ओर से आज उठती निगाहों में ये सवाल है बड़ा भारी कि, अब अमन-औ-चैन के मुल्क में, फिर प्यार के फूल खिलाएगा कौन? ऐसे जांबाज कौन?